Jabalpur में तीन वर्षों में 22 हजार से अधिक टीबी मरीज दर्ज

टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार टीबी उन्मूलन कार्यक्रम चला रही है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता बढ़ा रही है. जबलपुर जिले में टीबी मरीजों की पहचान के लिए करीब 6 लाख लोगों की स्कैनिंग की गई, जिसमें पिछले तीन वर्षों के अंदर 22 हजार से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं. इन सभी का उपचार स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में कर रहा है. हालांकि इन तीन सालों में टीबी से 541 लोगों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन साल दर साल मौतों के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है.

टीबी संक्रामक से फेफड़े होते हैं प्रभावित

डॉक्टरों का कहना है कि टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन इलाज में देरी होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है. जबलपुर को टीबी के मामले में संवेदनशील जिला घोषित किया गया है. यहां ग्रामीण इलाकों और शहरी स्लम क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है. यही वजह है कि स्क्रीनिंग के लिए घनी आबादी वाली बस्तियां, हॉस्टल, वृद्ध आश्रम, निचले इलाके और औद्योगिक क्षेत्रों में समूह में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से शामिल किया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर जांच और इलाज शुरू हो जाए तो टीबी 100 प्रतिशत तक ठीक हो सकती है.

लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

टीबी के लक्षण जैसे लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना और थकान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है. सबसे अहम बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की मुफ्त जांच और दवाएं उपलब्ध हैं. समय पर और नियमित रूप से दवाएं लेने से बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है, लेकिन कई बार मरीज बीच में ही दवाएं लेना छोड़ देते हैं और उनकी समुचित ट्रैकिंग नहीं हो पाती, जिससे समस्या ज्यादा गंभीर और विकराल हो जाती है.

भीड़भाड़ और कुपोषण से बढ़ रहा संक्रमण

दरअसल टीबी के बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलते हैं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में यह आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाते हैं. गरीबी, कुपोषण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है.

निक्षय मित्र बन रहे सहारा

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निक्षय मित्र भी बनाए जा रहे हैं, जो गरीब टीबी मरीजों को पोषण आहार उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं. इसके लिए शहर की सरकारी और केंद्र शासित संस्थाएं, सामाजिक संगठन तथा साधु-संत भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. निक्षय मित्र बनाने के मामले में जबलपुर पूरे प्रदेश में अव्वल है. करीब ढाई हजार निक्षय मित्र हर महीने टीबी मरीजों को फूड पैकेट उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उनके पोषण स्तर में सुधार हो और वे तेजी से स्वस्थ हो सकें.

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